कुलगीत
पुण्य प्रयाग की दिव्य धरा, ज्ञान विज्ञान का है आगर
यही हमारा विश्वविद्यालय, सकल विद्याओं का सागर
ज्ञान सदृश कुछ पवित्र नहीं, यह गीता करे बखान
यही हमारा मूलमंत्र है, यही हमारा साध्य निशान
ज्ञान कला संस्कृति विज्ञान की, यहाँ छलकी है गागर
यही हमारा विश्वविद्यालय, सकल विद्याओं का सागर
यहाँ कुम्भ और महाकुम्भ हैं, तुलसी मानस मर्यादा
संस्कृति की जो प्राणवायु है, प्रेम भक्ति भी है ज्यादा
लौकिक और अलौकिक रंग से, भरा है जिसका मन गागर
यही हमारा विश्वविद्यालय, सकल विद्याओं का सागर
हैं एकलव्य यहाँ के गौरव, गुरु भक्ति में जो आगे
भारद्वाज का आश्रम शुभ है, बौद्ध धर्म के बहु धागे
गंगा, यमुना, सरस्वती मिलती, त्रिवेणी की महिमा अपार
यही हमारा विश्वविद्यालय, सकल विद्याओं का सागर
पुण्य प्रयाग की दिव्य धरा, ज्ञान विज्ञान का है आगर
यही हमारा विश्वविद्यालय, सकल विद्याओं का सागर